2016-17 में टेक्स रिटर्न न जमा करने वालो की संख्या मे लगभग 10 गुना बढ़ी

याद करियें नोटबंदी के उन दिनो को जब लोग बैंको की लाइन मे लगकर एक नये देश की कल्पना और काले धन की वापसी की आस लगाये बैंको मे अपने ही जमा पैसो के लिये परेशान थे। सारे रास्ते लगभग बंद थे, खुला था तो सिर्फ एक रास्ता और वो था बैंक की लंबी लाइन ।

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नई दिल्ली : याद करियें नोटबंदी के उन दिनो को जब लोग बैंको की लाइन मे लगकर एक नये देश की कल्पना और काले धन की वापसी की आस लगाये बैंको मे अपने ही जमा पैसो के लिये परेशान थे। सारे रास्ते लगभग बंद थे, खुला था तो सिर्फ एक रास्ता और वो था बैंक की लंबी लाइन ।

थोड़े समय के बाद हमे नोट बंदी के कई सारे फायदे बताये गये जिनमे एक फायदा यह भी बताया गया था कि नोटबंदी के बाद से केन्द्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2016—17 मे 1.06 करोड़ नये करदाता जोड़े गये है जो कि पूर्व के वर्षो की तुलना मे कही ज्यादा था केन्द्र सरकार ने इसे 25 प्रति​शत की बढोत्तरी बताया था। लोगो ने इस पर भरोसा भी किया मन मे खुशी भी हुई कि हमारे लाइन मे लगने से देश मे कुछ अच्छा हुआ।

मगर इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट से ये बात सामने आई है कि जिस वित्तीय वर्ष मे नोटबंदी लागू की गई थी उसी वित्तीय वर्ष मे टेक्स रिटर्न न जमा करने वालो की संख्या मे लगभग 10 गुना बढोत्तरी हुई। इंडियन एक्सप्रेस द्वारा प्राप्त किए गए दस्तावेजों से पता चला है कि नोटबंदी लागू करने वाले साल में ही ‘स्टॉप फाइलर्स’ की संख्या में बड़े पैमाने पर वृद्धि हुई, जो कि पिछले चार सालों के ट्रेंड के बिल्कुल उलट था. ‘स्टॉप फाइलर’ उन्हें कहते हैं जिन्होंने पहले के वर्षों में रिटर्न दाखिल किया था, लेकिन वर्तमान वर्ष में ऐसा नहीं किया, हालांकि ऐसा करना उनके लिए जरूरी था. इनमें वे करदाता शामिल नहीं हैं जिनका निधन हो चुका है या जिनके पैन कार्ड रद्द या सरेंडर कर दिए गए हैं.

कर अधिकारियों ने कहा कि 2000-01 के बाद से यह लगभग दो दशकों में सबसे अधिक वृद्धि है. स्टॉप फाइलरों की संख्या वित्त वर्ष 2013 में 37.54 लाख से घटकर वित्तीय वर्ष 2014 में 27.02 लाख, वित्त वर्ष 2015 में 16.32 लाख और वित्त वर्ष 2016 में 8.56 लाख थी. अधिकारियों के अनुसार, नोटबंदी के जरिए 500 रुपये और 1,000 रुपये के पुराने नोटों को बंद करने के बाद आर्थिक गतिविधियों में गिरावट के कारण नौकरियों में कमी या आय में कमी स्टॉप फाइलर की वृद्धि का कारण हो सकता है.

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने कहा, ‘बड़ी संख्या में ऐसे व्यक्ति (1.75 करोड़ से अधिक) हैं जिनके मामले में टीडीएस/टीसीएस काटा गया है, लेकिन जो रिटर्न दाखिल नहीं करते हैं. ऐसे अधिकांश व्यक्तियों की कर योग्य आय नहीं है. ऐसे करदाताओं का आकलन वर्षवार विश्लेषण और विभिन्न आकलन वर्षों में उनकी संख्या में किसी भी असामान्य भिन्नता के कारणों के लिए कुछ और समय की आवश्यकता होगी.’

कर अधिकारियों ने यह भी कहा कि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) द्वारा 2016 में कर आधार (टैक्स बेस), करदाता और नए करदाता जैसे शब्दों की परिभाषा में बदलाव करदाताओं की संख्या में वृद्धि का कारण हो सकता है. सरकार का दावा है कि साल 2016-17 में 25 फीसदी की वृद्धि के साथ करदाताओं की संख्या 7.14 करोड़ पर पहुंच गई.

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