आजादी के आंदोलन के अमर योद्‍धा स्वर्गीय श्री ओमकार नाथ खरे की 95 वीं जयंती पर विचारोत्तेजक संगोष्ठी संपन्न

बेहोश होने तक हर बेंत पर क्रांतिकारी उद्घोष करते रहे ओमकार नाथ खरे

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आजादी के मूल्यों के लिए लड़े थे जिसका संकट गहराता जा रहा है

रीवा | विंध्य क्षेत्र के प्रख्यात स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय श्री ओमकार नाथ खरे की 95 वीं जयंती पर स्थानीय नेहरूनगर में एक विचारोत्तेजक संगोष्ठी संपन्न हुई | नारी चेतना मंच समाजवादी जन परिषद एवं विंध्याचल जन आंदोलन की ओर से आयोजित संगोष्ठी की अध्यक्षता नारी चेतना मंच की पूर्व अध्यक्ष मीरा पटेल ने की | कार्यक्रम में 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में स्वर्गीय ओमकार नाथ खरे की क्रांतिकारी भूमिका को विशेष रूप से याद किया गया | स्वर्गीय खरे को 17 वर्ष की अल्पायु में देश की आजादी के आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेने के कारण 13 माह तक रीवा केंद्रीय जेल में रखा गया था वहीं उन्हें 21 बेतों की सजा भी दी गई थी | नंगे बदन लगाई जाने वाली हर बेंत पर बेहोश होने तक विंध्य के वीर सपूत खरे इंकलाब जिंदाबाद भारत माता की जय और महात्मा गांधी जिंदाबाद का क्रांतिकारी उद्घोष करते रहे | सन 1947 में ऐतिहासिक दरबार कालेज रीवा (अब ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय ) के छात्रसंघ के चुनाव में श्री खरे अध्यक्ष निर्वाचित हुए | उन्होंने अध्यक्ष पद के चुनाव में श्री अर्जुन सिंह को परास्त किया था जो बाद में अविभाजित मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने वहीं  श्री खरे के छात्रसंघ के अध्यक्षीय कार्यकाल में श्रीयुत श्रीनिवास तिवारी महासचिव बने जो आगे चलकर मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री एवं विधानसभा अध्यक्ष भी रहे | स्वर्गीय खरे ने विंध्य क्षेत्र में समाजवादी आंदोलन को गतिशील बनाने में अहम भूमिका अदा की थी | बाद में प्रशासनिक सेवा क्षेत्र में भी ईमानदारी से काम किया जिसके चलते वहां भी संघर्ष चलता रहा | 20 अक्टूबर 1990 को 65 वर्ष की आयु में स्वर्गीय खरे ने अंतिम सांस ली | यह भारी विडंबना है कि राज्य शासन के द्वारा स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की जयंती एवं पुण्यतिथि पर याद करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है | ऐसे अवसरों के लिए शासन प्रशासन के पास दो फूल भी नहीं है | सरकार के प्रतिनिधि जिले के पांच स्वतंत्रता सेनानियों का नाम बताने की स्थिति में नहीं है | दरअसल देश के स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन के बारे में लोगों की जानकारी और जिज्ञासा धीरे-धीरे खत्म हो रही है जो किसी भी रुप में अच्छी बात नहीं है | आज असहमति के स्वरों को कुचलने से देश का लोकतंत्र भी खतरे में है | यह भारी विडंबना है कि इधर अन्याय और अत्याचार के खिलाफ अहिंसक आवाज उठाने वालों को भी देशद्रोही कहा जाने लगा है | स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आजादी के मूल्यों के लिए लड़े थे लेकिन आज उसका संकट गहराता जा रहा है | स्वतंत्रता संग्राम सेेेनानी स्वर्गीय ओमकार नाथ खरे केे ज्येष्ठ पुत्र समाजवादी जन परिषद के नेता अजय खरे ने कहा है कि आजादी के आंदोलन के मूल्यों की अनदेखी के चलते आजाद भारत का संकट गहराता जा रहा है | श्री खरे ने कहा देश में विषमता अन्याय का बोलबाला है | देश की संवैधानिक संस्थाएं अपने उद्देश्य से भटक गई हैैं | व्यक्ति महिमामंडन और पूंजीवाद बढ़ता जा रहा है | लोग रोजी रोटी के लिए मोहताज हो रहे हैं | अधिकार की लड़ाई लड़ने पर डंडे पड़ रहे हैंं | संगोष्ठी को डॉ प्रकाश तिवारी वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता शेषमणि शुक्ला हसीना बेगम के अलावा अशोक शर्मा भोपाल ने भी संबोधित किया | कार्यक्रम का संचालन अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय लॉ फैकेल्टी की प्राध्यापक श्रद्धा सिंह ने किया | इस अवसर पर रामाधार पटेल रामनिवास वर्मा शकुंतला वर्मा उमा केवट शिवानी पटेल प्रियंका केवट की उपस्थिति उल्लेखनीय रही |

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